२०२६ का स्वागत करते समय हम विचार करें कि यह वर्ष हमारे जीवन में क्या नवीनता लायेगा? हमें किस बात का उत्साह देगा? क्या यह आने वाला वर्ष सच में नया है? कहीं ऐसा तो नहीं कि ग़लती से हमारा पुराना वर्ष ही सामने आ रहा है? जिन विपरीत विचारों और आचरणों को २०२५ में हमने अपने में पहचाना, क्या २०२६ में भी उनका बने रहना हमें स्वीकार है?
ऐसा तो कोई भी नहीं चाहेगा। इसीलिए श्री युगल सरकार, परम पूज्य बाबूजी (श्रीहनुमानप्रसाद पोद्दार ‘भाईजी’), परम पूज्य श्रीराधाबाबा तथा परम पूज्य ‘नानाजी’ (श्री धर्मेंद्र मोहन सिन्हा) की असीम कृपा से २०२६ के रूप में हमें पुनः एक अवसर मिल रहा है कि हम अपने भगवत्-स्वरूप की ओर ठोस क़दम उठाने का अभ्यास करें। इस ‘अभ्यास-योग’ का स्वरूप बताते हुए (गीता ६/२६) में भगवान् कहते हैं –
यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम्।
ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत् ॥ २६ ॥
परन्तु जिसका मन वश में नहीं हुआ हो उसको चाहिए कि, यह स्थिर न रहने वाला और चंचल मन जिस-जिस कारण से सांसारिक पदार्थों में विचरता है, उस-उस से रोककर बारम्बार परमात्मा में ही निरोध करे ॥ २६ ॥
‘जीवन विज्ञान’ की व्याख्या में पूज्य नानाजी ने आश्वस्त किया है कि अपने सुधार के लिए शुभ-संकल्प लेने पर भी, पुराने अभ्यास के कारण साधक का उससे डिगना स्वाभाविक है। किंतु जब-जब ऐसा हो, तब-तब उसे तुरंत मुड़कर पुनः भगवान् की ओर बढ़ना चाहिए। गोष्ठियों में नानाजी समझाते थे – ‘यदि आप सड़क पर चलते-चलते फिसल कर गिर पड़ते हैं, तो क्या वहीं पड़े रहते हैं? नहीं, आप सावधान हो जाते हैं और उठ कर पुनः आगे चलने लगते हैं। भगवान् हमसे यही चाहते हैं।’
यह मार्गदर्शन हमारे सुधार के हर अभ्यास पर लागू किया जा सकता है –
- नियमित जप-स्वाध्याय-चिंतन के संकल्प से जब-जब हमारा मन डिगे, तब-तब उसे पुनः साधन में लगायें।
- अपने विपरीत विचारों को नियंत्रित करने में जब-जब हम लड़खड़ायें, तब-तब नवीन उत्साह के साथ उठ खड़े हों और उन विचारो पर विजय पाने में पुनः लग जायँ ।
- किसी विशेष व्यक्ति या परिस्थिति को लेकर जब-जब हमारे मन में उत्तेजना या द्वेष भाव उठे, ऐसे प्रत्येक अवसर पर पूज्य नानाजी के बताये ‘पाँच आनन्द बिंदु’ का स्मरण करें और ऐसी प्रतिक्रिया से मुक्त होने के लिए कटिबद्ध हो जायँ ।
इस प्रकार भगवान् और पूज्य संतों की कृपा का आश्रय लेकर हम अपने हर विपरीत अभ्यास को सुधारने के लिए २०२६ का उपयोग करें। इस अभ्यास से जीवन में आनन्द की लहर स्वाभाविक ही उमड़ पड़ेगी और २०२६ वास्तव में हमारे लिये शुभ नववर्ष बन जाएगा।
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